Rishi Panchami 2025:
लेखक: Nitesh Panwar | Copyright ©️ terdingnewsin
ऋषि पंचमी 2025 क्या है?
ऋषि पंचमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र व्रत है जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व सप्तऋषियों के सम्मान और स्मरण के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को जीवन भर में जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 2025 में ऋषि पंचमी का व्रत 28 अगस्त, गुरुवार को मनाया जाएगा। Rishi Panchami 2025:
ऋषि पंचमी 2025 का शुभ मुहूर्त
- तिथि आरंभ: 27 अगस्त 2025, दोपहर 3:44 बजे
- तिथि समाप्त: 28 अगस्त 2025, शाम 5:56 बजे
- पूजा का श्रेष्ठ समय: 28 अगस्त, सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक
इस समय पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस अवधि में पूजा-अर्चना करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। Rishi Panchami 2025:
ऋषि पंचमी की पूजा विधि (Rishi Panchami Puja Vidhi)
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- गृह स्थान पर कलश स्थापित कर भगवान गणेश का स्मरण करें।
- सप्तऋषियों की प्रतिमा अथवा चित्र के सामने दीपक जलाएं।
- फूल, चंदन, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
- ऋषियों के नामों का उच्चारण करें और विशेष मंत्र का जाप करें: Rishi Panchami 2025:
“कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः।।
गृह्णन्त्वर्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा।।”
इस मंत्र का जाप करने से सप्तऋषि प्रसन्न होते हैं और साधक को आशीर्वाद देते हैं।
ऋषि पंचमी व्रत कथा (Rishi Panchami Vrat Katha 2025)
प्राचीन विदर्भ देश में उत्तंक नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुशीला और संतान के साथ रहता था। उनकी पुत्री विवाह के कुछ समय बाद विधवा हो गई और परिवार गंगा तट पर कुटिया बनाकर रहने लगा। एक दिन पुत्री के शरीर में कीड़े पड़ गए। दुखी होकर माता-पिता ने कारण पूछा। ब्राह्मण ने समाधि द्वारा जाना कि पिछले जन्म में कन्या ने रजस्वला काल में अशुद्धि की अवहेलना की थी और ऋषि पंचमी व्रत नहीं किया था। Rishi Panchami 2025:
पिता के मार्गदर्शन में पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत किया और इसके प्रभाव से उसके सारे दोष मिट गए। अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य और सुख प्राप्त हुआ। इस कथा से यह सिद्ध होता है कि व्रत और भक्ति से पाप मिटते हैं और जीवन में सुख-शांति मिलती है। Rishi Panchami 2025:
ऋषि पंचमी का महत्व (Rishi Panchami 2025: Significance)
ऋषि पंचमी केवल व्रत ही नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और पापमोचन का पर्व है। यह दिन सप्तऋषियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से—
- पूर्व जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं।
- जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
- संतान सुख और वैवाहिक जीवन की खुशहाली मिलती है।
- आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गंगा स्नान और ऋषि पंचमी
शास्त्रों में उल्लेख है कि ऋषि पंचमी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। गंगा स्नान करके व्रत करने से न केवल शारीरिक शुद्धि होती है बल्कि आध्यात्मिक पवित्रता भी प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
आधुनिक दृष्टिकोण
,आज के समय में ऋषि पंचमी केवल धार्मिक व्रत ही नहीं बल्कि आत्मअनुशासन और स्वच्छता का प्रतीक भी है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग शरीर और मन को संयमित रखते हैं, जिससे मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ती है। युवा पीढ़ी इस व्रत को न केवल परंपरा के रूप में बल्कि आत्मचिंतन और संस्कारों को समझने के अवसर के रूप में भी देखती है। https://www.aajtak.in/sports/cricket/story/r-ashwin-retires-from-ipl-opens-door-for-t20-leagues-tspok-dskc-2319278-2025-08-27 https://terdingnews.in/pant-kitchen-pizza-video-viral/
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