IPO का महाकुंभ

✍ लेखक: Nitesh Panwar | © terdingnews.in

2025 का सबसे बड़ा फाइनेंशियल धमाका – IPO ब्लिट्ज

भारत का शेयर बाजार हमेशा से निवेशकों की धड़कनों से जुड़ा हुआ रहा है। हर छोटे-बड़े उतार-चढ़ाव का असर सीधे निवेशकों की जेब पर पड़ता है। लेकिन इस बार जो होने वाला है, वह साधारण घटना नहीं है। 2025 की आखिरी तिमाही में भारत करीब 8 बिलियन डॉलर के IPO लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। जी हां, आपने सही सुना – यह सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि दर्जनों कंपनियों का “मेगा ब्लिट्ज” होगा। IPO का महाकुंभ

इस खबर ने निवेशकों के बीच जोश भर दिया है और मार्केट एनालिस्ट इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी IPO लहर बता रहे हैं। इतनी बड़ी कैपिटल इनफ्लो का असर सिर्फ मार्केट तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था और ग्लोबल इन्वेस्टर्स की नजरों में भारत की पोजिशन को भी और मजबूत करेगा।

IPO क्या होता है और क्यों होता है?

IPO यानी Initial Public Offering – जब कोई प्राइवेट कंपनी अपनी हिस्सेदारी (शेयर) आम जनता को बेचने का फैसला करती है, ताकि वह फंड जुटा सके। यह पैसा कंपनी अपने विस्तार, नए प्रोजेक्ट्स, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, कर्ज चुकाने या ग्लोबल मार्केट में एंट्री के लिए इस्तेमाल करती है। IPO का महाकुंभ

IPO से आम निवेशकों को भी मौका मिलता है कि वे कंपनी की शुरुआती ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बनें। कई बार यही शुरुआती निवेश बाद में सोने की खान साबित होता है – उदाहरण के तौर पर Infosys, TCS, Zomato, Nykaa जैसे IPOs।

भारत का IPO इतिहास – उतार-चढ़ाव से भरा सफर

भारत में IPO का सफर काफी पुराना है। 1990 के दशक में जब मार्केट खोला गया, तब पहली बार रिटेल निवेशकों ने IPO की ताकत को महसूस किया। उसके बाद 2000 के दशक में टेक्नोलॉजी कंपनियों ने IPO के जरिए जबरदस्त ग्रोथ हासिल की।IPO का महाकुंभ

2017 से 2022 तक भारत में IPO मार्केट ने इतिहास रचा। सिर्फ 2021 में ही 60 से ज्यादा IPO आए, जिनमें से Paytm, Policybazaar, Nykaa, Zomato सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। हालांकि Paytm जैसे IPO ने निवेशकों को निराश भी किया, लेकिन Nykaa और Zomato जैसे नामों ने लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न दिया।

2025 का IPO ब्लिट्ज पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है।

2025 का IPO ब्लिट्ज क्यों खास है?

यह सवाल हर किसी के मन में है कि आखिर यह IPO सीजन इतना खास क्यों है? इसके कई कारण हैं – IPO का महाकुंभ

  • त्योहारी सीजन: साल के आखिर में निवेशकों के पास अतिरिक्त पैसा होता है। कंपनियां इसी वक्त IPO लाना पसंद करती हैं।
  • इकोनॉमी बूम: भारत की GDP 6-7% की दर से बढ़ रही है, जिससे कंपनियों को भरोसा है कि निवेशकों की भूख बनी रहेगी।
  • ग्लोबल इन्वेस्टमेंट: विदेशी निवेशक भारत को सबसे तेजी से बढ़ते मार्केट के रूप में देख रहे हैं।
  • 8 बिलियन डॉलर का आकार: इतनी बड़ी रकम भारतीय IPO इतिहास में पहली बार जुटाई जाएगी।

किन सेक्टर्स की कंपनियां करेंगी धूम?

IPO की इस लहर में अलग-अलग सेक्टर्स शामिल होंगे। कुछ प्रमुख सेक्टर्स –

  1. फिनटेक: डिजिटल पेमेंट और फिनटेक कंपनियां लगातार बढ़ रही हैं। UPI और डिजिटल इंडिया अभियान ने इन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
  2. EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स): भारत का EV सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार के प्रोत्साहन और ऑटो कंपनियों की भागीदारी इसे बड़ा बनाएगी।
  3. हेल्थकेयर: कोविड के बाद हेल्थ सेक्टर की अहमियत बढ़ी है। अस्पताल, फार्मा और हेल्थटेक स्टार्टअप्स IPO की लाइन में हैं।
  4. ई-कॉमर्स: ऑनलाइन शॉपिंग में धूम है। फ्लिपकार्ट, मीशो जैसी कंपनियों पर निगाह है।
  5. इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों, मेट्रो और ग्रीन एनर्जी में काम करने वाली कंपनियां IPO लाकर कैपिटल जुटाना चाहती हैं। IPO का महाकुंभ

अनुमानित IPO लाइन-अप (सूत्रों के हवाले से)

हालांकि कंपनियों ने आधिकारिक रूप से अपने नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन मार्केट में चर्चा जोरों पर है कि निम्नलिखित कंपनियां कतार में हैं:

  • एक प्रमुख EV स्टार्टअप जो टेस्ला जैसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।
  • हेल्थटेक कंपनी जिसने AI से लैस डायग्नोस्टिक सॉल्यूशंस तैयार किए हैं।
  • फिनटेक दिग्गज जो UPI 3.0 लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।
  • ई-कॉमर्स यूनिकॉर्न जिसने ग्रामीण भारत में धूम मचाई है।
  • ग्रीन एनर्जी कंपनी जो सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही है।

निवेशकों के लिए गोल्डन मौका

यह IPO सीजन निवेशकों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है। क्योंकि –

  • लिस्टिंग गेन की संभावना ज्यादा है।
  • लंबी अवधि में मजबूत कंपनियां मल्टीबैगर साबित हो सकती हैं।
  • रिटेल निवेशक कम रकम से भी बड़े ब्रांड्स का हिस्सा बन सकते हैं। IPO का महाकुंभ

⚠ निवेशकों के लिए चेतावनी

हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। IPO में भी रिस्क शामिल है –

  • कई बार IPO ओवरप्राइस्ड होते हैं।
  • हर कंपनी का बिजनेस मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होता।
  • मार्केट की गिरावट IPO को भी डुबो सकती है।

इसलिए निवेशकों को कंपनी की बैलेंस शीट, प्राइस बैंड और बिजनेस मॉडल अच्छे से समझकर ही निवेश करना चाहिए।

ग्लोबल मार्केट का असर

ग्लोबल ट्रेंड्स का IPO पर सीधा असर होता है। अगर अमेरिका, चीन या यूरोप की इकोनॉमी में हलचल होती है तो उसका असर भारत के IPO मार्केट पर भी दिखता है। लेकिन भारत की पॉपुलेशन, डोमेस्टिक खपत और डिजिटल रेवोल्यूशन इसे मजबूत बनाए रखते हैं। IPO का महाकुंभ

विशेषज्ञों की राय

“भारत का IPO मार्केट 2025 में ग्लोबल स्तर पर नई पहचान बनाएगा। यह 8 बिलियन डॉलर का ब्लिट्ज भारत को एशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे आकर्षक इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बना देगा।” – मार्केट एनालिस्ट IPO का महाकुंभ

आम आदमी पर IPO का असर

IPO का असर सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं रहता। जब कंपनियां पब्लिक होती हैं, तो वे जॉब क्रिएशन, नए प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी में पैसा लगाती हैं। इससे आम आदमी को रोजगार और बेहतर सेवाएं मिलती हैं। IPO का महाकुंभ

निष्कर्ष – गोल्डन सीजन की दस्तक

कुल मिलाकर साल 2025 की आखिरी तिमाही भारत के IPO मार्केट के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली है। 8 बिलियन डॉलर के IPOs न सिर्फ मार्केट को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकेंगे। निवेशकों के लिए यह सीजन सोने पर सुहागा है – बशर्ते वे समझदारी और रिसर्च के साथ IPO का महाकुंभ कदम उठाएं। https://terdingnews.in/sensex-nifty/ https://www.amarujala.com/business?src=mainmenu

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