जापानी टूरिस्ट से रिश्वत कांड:
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में ट्रैफिक पुलिस पर बड़ा दाग लग गया है। एक जापानी महिला पर्यटक और उसके साथी से 1000 रुपये नकद रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने के बाद तीन पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। यह मामला सिर्फ रिश्वत का नहीं, बल्कि पूरे पुलिस सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। जापानी टूरिस्ट से रिश्वत कांड:
कैसे हुआ रिश्वत का खेल?
वीडियो में साफ देखा गया कि जापानी महिला बाइक चला रही थी और पीछे उसका साथी हेलमेट के बिना बैठा था। ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें रोक लिया। महिला को पहले पहचान पत्र मांगा गया और फिर जुर्माने की जगह सीधे 1000 रुपये नकद की मांग की गई। डर और मजबूरी में विदेशी पर्यटक ने पैसे थमा दिए। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पुलिसकर्मियों ने चालान की कोई रसीद नहीं दी। जापानी टूरिस्ट से रिश्वत कांड:
होमगार्ड ने दिया “फ्री पास”
वीडियो में यह भी देखा गया कि वहां मौजूद एक होमगार्ड ने महिला को अपना मोबाइल नंबर थमाते हुए कहा कि अब उन्हें न सिर्फ गुरुग्राम बल्कि पूरे हरियाणा में कहीं भी रोका जाए तो वह फोन पर बात करवा देगा। यानी एक तरह से पर्यटकों को नियम तोड़ने का “फ्री पास” दे दिया गया। जापानी टूरिस्ट से रिश्वत कांड:
सोशल मीडिया पर मचा बवाल
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पुलिस की छवि पर गहरी चोट पड़ी। लोगों ने सवाल उठाए कि जब विदेशी मेहमानों के साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है, तो आम नागरिकों के साथ कैसा होता होगा? कई लोगों ने इसे देश की बदनामी बताया और सख्त कार्रवाई की मांग की। जापानी टूरिस्ट से रिश्वत कांड:
पुलिस की सफाई और कार्रवाई
डीसीपी ट्रैफिक डॉ. राजेश मोहन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि रिश्वतखोरी पर “जीरो टॉलरेंस पॉलिसी” लागू है। इसलिए तीनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है और जांच कमेटी गठित कर दी गई है। उन्होंने जनता से भी अपील की कि अगर कहीं इस तरह की घटना दिखे तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। जापानी टूरिस्ट से रिश्वत कांड:
विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल
भारत हर साल लाखों पर्यटकों का स्वागत करता है। लेकिन जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो यह न सिर्फ प्रशासन बल्कि देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। जापानी महिला और उसके साथी का कहना है कि वे यहां घूमने आए थे लेकिन इस घटना ने उन्हें डर और अविश्वास से भर दिया।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि यह “टिप ऑफ द आइसबर्ग” है। यानी ऐसे मामले अक्सर होते होंगे लेकिन कैमरे पर नहीं आते। लोगों ने लिखा – “विदेशियों को तो छोड़िए, हमें रोज ऐसे अनुभव होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कैमरे ने पकड़ लिया।”
क्या बदलेगा सिस्टम?
हरियाणा पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल यही है कि क्या सिर्फ निलंबन काफी है? जब तक रिश्वतखोरी की जड़ पर वार नहीं होगा, तब तक जनता का भरोसा वापस लाना मुश्किल है।
निष्कर्ष
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जो पुलिस जनता की सुरक्षा और नियमों की रखवाली के लिए तैनात है, वही अगर रिश्वत के खेल में शामिल हो जाए तो कानून और न्याय का क्या होगा? सरकार और पुलिस प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों पर सिर्फ कार्रवाई न हो बल्कि पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए ताकि आम नागरिक और विदेशी मेहमान दोनों सुरक्षित और निडर महसूस कर सकें। https://www.ndtv.com/latest
लेखक: Nitesh Panwar
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