ED Raid

लेखक: Nitesh Panwar | कॉपीराइट: terdingnews.in

कोलकाता में ED Raid की छापेमारी से मचा राजनीतिक भूचाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति उस समय उबाल पर आ गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर व ऑफिस पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुद मौके पर पहुंचना और फाइल हाथ में लेकर बाहर निकलना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।

ED Raid का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जांच के दौरान एजेंसी के काम में रुकावट डाली, जबकि ममता बनर्जी ने इसे पूरी तरह राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।

क्या है पूरा मामला? घटनाक्रम को समझिए

गुरुवार सुबह करीब 6 बजे ED Raid की टीम ने कोलकाता में I-PAC से जुड़े कई ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई 2020 में दर्ज उस मामले से जुड़ी है, जिसमें पूर्वी कोलफील्ड्स क्षेत्र में कोयला तस्करी और हवाला लेन-देन के आरोप लगे थे।

करीब 11:30 बजे के आसपास स्थिति तब बिगड़ी जब पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर और फिर स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर पहुंच गईं।

फाइल उठाकर बाहर निकलने का आरोप

ED Raid का दावा है कि ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर में जबरन दाखिल हुईं और वहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अपने साथ ले गईं। इसके बाद वे सॉल्ट लेक स्थित I-PAC ऑफिस भी पहुंचीं, जहां कथित तौर पर राज्य पुलिस की मदद से सबूत हटाए गए।

जब ममता बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल थी, जिसे लेकर मीडिया के कैमरों में तस्वीरें कैद हो गईं। यही तस्वीरें बाद में विवाद की सबसे बड़ी वजह बनीं।

ममता बनर्जी का पलटवार: “प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री को कंट्रोल कीजिए”

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:

“मुझे माफ करें प्रधानमंत्री जी, लेकिन कृपया अपने गृह मंत्री को कंट्रोल करें। यह एजेंसियों का दुरुपयोग है। वे हमारी पार्टी के दस्तावेज, हमारी रणनीति और हमारे वोटर्स का डेटा लूटना चाहते हैं।”

ममता ने आगे कहा कि यदि भाजपा उनसे लड़ना चाहती है, तो लोकतांत्रिक तरीके से मैदान में आए, न कि केंद्रीय एजेंसियों का सहारा लेकर।

ED Raid का पक्ष: “सबूतों के आधार पर हुई कार्रवाई”

प्रवर्तन निदेशालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि छापेमारी पूरी तरह कानूनी और ठोस सबूतों के आधार पर की गई थी।

ED के अनुसार, एक हवाला ऑपरेटर के जरिए Indian PAC Consulting Pvt Ltd को करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन किए गए थे। यह पैसा कथित तौर पर कोयला तस्करी से जुड़ा हुआ था।

एजेंसी का यह भी कहना है कि कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचने से जांच बाधित हुई।

मामला पहुंचा कलकत्ता हाईकोर्ट

सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर ED Raid ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दूसरी ओर, I-PAC ने भी सर्च ऑपरेशन की वैधता को चुनौती दी है।

मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस सुवरा घोष की बेंच में होनी है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

प्रतीक जैन के परिवार का पलटवार

प्रतीक जैन के परिवार ने भी ED Raid अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि एजेंसी ने उनके घर से महत्वपूर्ण निजी दस्तावेज जबरन उठा लिए।

इस संबंध में शेक्सपीयर सरानी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

भाजपा का आरोप

बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसियों के काम में सीधा हस्तक्षेप किया है, जो कानूनन अपराध है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में ममता बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस का रुख

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि I-PAC एक कॉर्पोरेट संस्था होते हुए भी तृणमूल कांग्रेस के लिए पार्टी कार्यालय की तरह काम करती है।

I-PAC क्या है? जानिए पूरी जानकारी

I-PAC (Indian Political Action Committee) एक राजनीतिक परामर्श देने वाली संस्था है, जो चुनावी रणनीति, डेटा एनालिटिक्स, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच का काम करती है।

  • स्थापना: 2013
  • संस्थापक: प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन
  • पहला नाम: Citizens for Accountable Governance (CAG)
  • TMC से जुड़ाव: 2021 से

प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद I-PAC की पूरी जिम्मेदारी प्रतीक जैन के पास आ गई। बाद में प्रशांत किशोर ने बिहार में ‘जन सुराज’ आंदोलन शुरू किया। ED Raid

आगे क्या?

इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है। एक ओर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री की भूमिका भी कानूनी जांच के घेरे में है।

हाईकोर्ट का फैसला तय करेगा कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध है या कानून के तहत की गई वैध कार्रवाई। https://www.aajtak.in/ https://terdingnews.in/raj-nidimoru-net-worth/

निष्कर्ष: I-PAC छापेमारी ने केवल एक जांच नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच टकराव को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला न सिर्फ अदालतों में, बल्कि चुनावी राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनने वाला है।

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