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रहस्यमयी रात: चंद्र ग्रहण 2025

फोटो क्रेडिट: Unsplash (No Copyright)

लेखक: Nitesh Panwar | Copyright ©️ terdingnews.in

चंद्र ग्रहण 2025: आखिर क्यों बना चर्चा का विषय?

8 सितंबर 2025 की रात को भारत समेत पूरी दुनिया ने एक अद्भुत खगोलीय घटना देखी – पूर्ण चंद्र ग्रहण यानी ब्लड मून। यह नजारा लोगों को रहस्यमयी भी लगा और आकर्षक भी। हजारों सालों से चंद्र ग्रहण को लोग धार्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से खास मानते आए हैं। लेकिन इस बार का ग्रहण इसलिए और खास रहा क्योंकि इसमें चांद का रंग गहरा लाल और तांबे जैसा दिखा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “Blood Moon” कहा जाता है। रहस्यमयी रात:

सोशल मीडिया पर भी ब्लड मून की तस्वीरें और वीडियो छा गए। लोगों ने इसे अपने-अपने कैमरे और मोबाइल से कैद किया और तुरंत शेयर कर दिया। इतना ही नहीं, धार्मिक दृष्टि से भी यह ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण रहा।

ब्लड मून का वैज्ञानिक कारण ब्लड मून 2025

जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य की रोशनी सीधे चांद तक नहीं पहुंच पाती, तो उसे चंद्र ग्रहण कहते हैं। लेकिन ब्लड मून तब बनता है जब सूर्य की कुछ रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर चांद पर गिरती है। इस दौरान नीली रोशनी तो छितरा जाती है, जबकि लाल रंग की रोशनी चांद तक पहुंचती है। यही वजह है कि चांद उस समय तांबे जैसे लाल रंग का दिखाई देता है। रहस्यमयी रात:

  • पृथ्वी की छाया चांद को ढक लेती है। लूनर इक्लिप्स टाइमिंग
  • वायुमंडल लाल रोशनी को चांद तक पहुंचा देता है।
  • इससे चांद का रंग गहरा लाल दिखने लगता है।

भारत में कब और कहां दिखा चंद्र ग्रहण?

इस बार का चंद्र ग्रहण भारत में रात 8:17 बजे से शुरू हुआ और देर रात तक चला। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, भोपाल, लखनऊ, जयपुर, पटना, रांची, गुवाहाटी जैसे बड़े शहरों में इसे साफ-साफ देखा गया। गांवों में भी लोग आसमान की तरफ निहारते रहे और ब्लड मून को देखने का आनंद उठाते रहे। रहस्यमयी रात:

हालांकि कुछ इलाकों में बादलों की वजह से लोगों को पूरा दृश्य साफ नजर नहीं आया। इसके बावजूद सोशल मीडिया और टीवी चैनलों ने इस नजारे को हर किसी तक पहुंचा दिया। खगोलीय घटनाएं

धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया जाता है। ग्रहण लगने से पहले “सूतक काल” मान्य होता है, जिसके दौरान कई धार्मिक कार्य वर्जित हो जाते हैं। लोग मंदिरों के दरवाजे बंद कर देते हैं, पूजा-पाठ रोक दी जाती है और केवल मंत्र जप करने की सलाह दी जाती है। रहस्यमयी रात: भारत में चंद्र ग्रहण

ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करने और घर को शुद्ध करने की परंपरा है। ज्योतिषियों के अनुसार यह ग्रहण कई राशियों पर असर डाल सकता है। किसी के लिए यह शुभ संकेत लेकर आता है तो किसी के लिए थोड़ा सावधानी बरतने का समय।

दुनियाभर में ब्लड मून की हलचल रहस्यमयी रात:

केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई देशों में यह ग्रहण देखा गया। NASA ने भी इसे लेकर लाइव अपडेट दिया। वहीं, खगोलविदों के लिए यह एक बेहतरीन मौका था रिसर्च और स्टडी करने का।

यूट्यूब और फेसबुक पर लाखों लोग इसे लाइव देखते रहे। इससे साफ है कि ब्लड मून सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक और मनोरंजन की दृष्टि से भी बड़ी घटना है।

ब्लड मून सोशल मीडिया पर वायरल

ट्विटर (अब X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #BloodMoon2025 और #ChandraGrahan2025 हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोगों ने ब्लड मून की खूबसूरत तस्वीरें शेयर कीं और अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। किसी ने इसे रोमांटिक कहा तो किसी ने डरावना, लेकिन सभी के लिए यह यादगार रहा। रहस्यमयी रात:

धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी मान्यताएं

भारत में आम धारणा है कि ग्रहण के दौरान खाना-पीना नहीं चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों में लिखा है कि ग्रहण के दौरान केवल मंत्र जाप, ध्यान और भगवान का स्मरण करना चाहिए। रहस्यमयी रात:

FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. चंद्र ग्रहण 2025 कब लगा?

यह ग्रहण 8 सितंबर 2025 की रात को लगा और भारत में साफ देखा गया।

2. ब्लड मून क्यों बनता है? रहस्यमयी रात:

जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य की लाल रोशनी चांद तक पहुंचती है तो चांद लाल दिखने लगता है।

3. क्या चंद्र ग्रहण के दौरान खाना खाना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान खाना-पीना वर्जित है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं है।

4. क्या ब्लड मून हर साल दिखाई देता है?

नहीं, यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है। यह तब बनता है जब पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की लाल रोशनी चांद तक पहुंचती है। https://www.ndtv.com https://terdingnews.in/germany-study-hub-2025/

लेखक: Nitesh Panwar | ©️ 2025 terdingnews.in

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