“विदेशी निवेशक भागे

“विदेशी निवेशक भागे,

FPIs की लगातार बिकवाली से शेयर बाजार में हाहाकार, रुपया टूटा, निवेशकों की नींद उड़ गई FPI निकासी,

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की भारी निकासी ने निवेश माहौल हिला दिया।

लेखक: Nitesh Panwar | Copyright ©️ terdingnews.in | 5 सितम्बर 2025

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (Foreign Portfolio Investors – FPIs) हमेशा से भारतीय शेयर बाजार में रफ्तार और भरोसे के प्रतीक माने जाते रहे हैं। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। लगातार कुछ महीनों से विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट से पैसा निकालने की रफ्तार तेज कर दी है। इसे महज एक मामूली उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि बड़े निकासी रुझान के तौर पर देखा जा रहा है। यह खबर अब सिर्फ वित्तीय अखबारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के हर आम निवेशक के घर तक पहुंच चुकी है। विदेशी निवेशक भागे,

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त और सितम्बर के पहले हफ्ते में ही FPIs ने हजारों करोड़ रुपये की पूंजी बाहर निकाल ली। इससे बाजार में भूचाल जैसे हालात बन गए हैं। सेंसेक्स और निफ्टी दिन-प्रतिदिन कमजोर हो रहे हैं, रुपया टूट रहा है और आम निवेशक घबराहट में है। विदेशी निवेशक भागे,

आखिर क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक? शेयर बाजार,

अब सवाल उठता है कि विदेशी निवेशक आखिर क्यों अचानक भारतीय बाजार से पैसा समेटने लगे? इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें घरेलू और वैश्विक दोनों पहलू शामिल हैं। आइए एक-एक करके समझते हैं:

  1. डॉलर की मजबूती: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को ऊँचाई पर बनाए रखा है। इससे डॉलर में निवेश ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक लग रहा है। नतीजा यह कि निवेशक भारत से पैसा निकालकर अमेरिका और यूरोप की ओर मोड़ रहे हैं।
  2. रुपये की कमजोरी: रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है। विदेशी निवेशकों को अपने रिटर्न का असली फायदा नहीं मिल रहा, क्योंकि रुपया गिरने से उन्हें नुकसान हो रहा है।
  3. मंदी का डर: वैश्विक बाजारों में मंदी का खतरा मंडरा रहा है। निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं और उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।
  4. भारत की महंगाई: देश में लगातार महंगाई बढ़ रही है। खाने-पीने से लेकर ऊर्जा तक हर चीज महंगी हो रही है। इससे निवेश माहौल पर भी दबाव है।
  5. नीतिगत अनिश्चितता: सरकार के कुछ आर्थिक फैसले और टैक्स पॉलिसी को लेकर विदेशी निवेशक असमंजस में हैं। उन्हें लगता है कि आने वाले दिनों में और सख्ती आ सकती है। विदेशी निवेशक भागे,

भारतीय शेयर बाजार पर तगड़ा प्रहार निवेशक, मार्केट,

जब कोई बड़ा खिलाड़ी मैदान छोड़ता है तो खेल का संतुलन बिगड़ जाता है। यही हाल भारतीय शेयर बाजार का है। FPIs की बिकवाली से निफ्टी और सेंसेक्स में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। FIIs की लगातार निकासी से बाजार की लिक्विडिटी भी प्रभावित हो रही है। विदेशी निवेशक भागे,

छोटे निवेशक डर के साए में जी रहे हैं। हर दिन बाजार खुलते ही गिरावट का डर बना रहता है। यही कारण है कि रिटेल इन्वेस्टर्स भी अपनी पूंजी निकालने लगे हैं। म्यूचुअल फंड SIPs में नए निवेश की रफ्तार धीमी हो गई है।

रुपये पर डबल झटका भारतीय मार्केट संकट

विदेशी निवेशकों की निकासी का सीधा असर रुपये पर पड़ा है। डॉलर की मांग बढ़ गई है और रुपया टूटता जा रहा है। एक तरफ विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव है, दूसरी तरफ आयात बिल बढ़ रहा है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है क्योंकि महंगाई और बढ़ने के आसार हैं। विदेशी निवेशक भागे,

तेल, गैस और सोना जैसे बड़े आयात महंगे हो गए हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और यह हर उत्पाद की कीमत को प्रभावित करेगा। इस तरह FPIs का पलायन सिर्फ बाजार को नहीं, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को हिला रहा है।

आम निवेशक की नींद उड़ी विदेशी निवेशक भागे,

छोटे निवेशक जिनकी मेहनत की कमाई म्यूचुअल फंड्स और शेयर बाजार में लगी थी, वे सबसे ज्यादा परेशान हैं। SIPs से लेकर स्टॉक पोर्टफोलियो तक सबकी वैल्यू घट रही है। घबराहट में कई निवेशक घाटे में भी शेयर बेचने लगे हैं, ताकि और नुकसान से बचा जा सके।

गांव-गांव और कस्बों तक फैली म्यूचुअल फंड संस्कृति भी इस निकासी से प्रभावित हो रही है। निवेशक यह सोचकर परेशान हैं कि जो पैसे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए लगाए थे, वो डूब तो नहीं जाएंगे।

सरकार और RBI की रणनीति

हालात को संभालने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक दोनों एक्टिव मोड में हैं। RBI विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट कर रहा है। वहीं सरकार निवेश माहौल बेहतर बनाने और विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस जीतने के लिए नीतिगत फैसले ले सकती है। विदेशी निवेशक भागे,

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार टैक्स में राहत और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स पर राहत देती है, तो FPIs का मूड बदल सकता है। इसके अलावा Make in India और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देना भी निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।

भविष्य की राह और उम्मीद

यह सच है कि अभी हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। GDP ग्रोथ रेट अब भी दुनिया की सबसे तेज़ है। मध्यवर्ग की बढ़ती खपत और डिजिटल इंडिया जैसे अभियान देश को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाए रखते हैं। विदेशी निवेशक भागे,

विदेशी निवेशकों का पैसा हमेशा के लिए बाहर नहीं जाता। जब हालात स्थिर होंगे और वैश्विक जोखिम कम होगा, तो वही FPIs दोबारा भारतीय बाजार की ओर लौटेंगे। इसलिए यह वक्त घबराने का नहीं, बल्कि धैर्य रखने का है।

निष्कर्ष: मुश्किल वक्त, लेकिन उम्मीद बाकी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का पलायन फिलहाल भारतीय बाजार के लिए एक सख्त इम्तिहान है। लेकिन भारत की ताकत उसकी अर्थव्यवस्था, युवा आबादी और विकास की क्षमता है। इस संकट से उबरने के बाद भारतीय बाजार पहले से और ज्यादा मजबूत होकर सामने आ सकता है। विदेशी निवेशक भागे,

छोटे निवेशकों के लिए संदेश साफ है — धैर्य रखो, घबराओ मत। बाजार हमेशा उतार-चढ़ाव से गुजरता है। लंबी अवधि का नजरिया अपनाओ और समझदारी से कदम बढ़ाओ। https://terdingnews.in/grace-clinton-manchester-city-transfer/ https://indianexpress.com/section/india/

लेखक: Nitesh Panwar | Copyright ©️ terdingnews.in

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