देश बंद 2025:
भारत बंद 2025: एक ऐतिहासिक हड़ताल जिसने देश को झकझोर दिया
3 अगस्त 2025 को देश ने एक बार फिर से उस दृश्य को देखा जिसे इतिहास में ‘जन आंदोलन’ के नाम से दर्ज किया जाएगा। 10 से अधिक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के नेतृत्व में, लगभग 25 करोड़ मजदूर और कर्मचारी एक साथ विरोध में उतर आए। यह हड़ताल सिर्फ विरोध का तरीका नहीं, बल्कि एक कड़ा संदेश था सरकार की उन नीतियों के खिलाफ, जिन्हें ट्रेड यूनियनें ‘श्रम विरोधी’, ‘किसान विरोधी’ और ‘जनविरोधी’ बता रही हैं। देश बंद 2025:
इस व्यापक भारत बंद का असर पूरे देश में देखने को मिला, जिसमें बैंकिंग, डाक सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन, बीमा, खनन और निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए।
हड़ताल का कारण: आखिर क्यों उठाए मजदूरों ने झंडा?
ट्रेड यूनियनों ने यह हड़ताल मुख्य रूप से चार नए लेबर कोड्स के विरोध में और सरकार की निजीकरण की आक्रामक नीतियों के खिलाफ की है। यूनियनों का आरोप है कि ये कानून न केवल मजदूरों के अधिकारों को सीमित करते हैं बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों को कॉर्पोरेट हाथों में सौंपने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। देश बंद 2025:
उनका मानना है कि यह देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ हटाने जैसा है। इसके साथ ही निजीकरण की आंधी में सार्वजनिक उपक्रमों को कॉर्पोरेट घरानों को बेचा जा रहा है, जिससे रोजगार में असुरक्षा बढ़ रही है। देश बंद 2025:
इन 10 केंद्रीय यूनियनों ने दी अगुवाई
- इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
- ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
- हिंद मजदूर सभा (HMS)
- सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU)
- ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)
- ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)
- सेल्फ-एम्प्लॉइड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA)
- ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU)
- लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)
- यूटीयूसी (United Trade Union Congress)
इसके साथ-साथ संयुक्त किसान मोर्चा, कई क्षेत्रीय संगठन और कुछ विपक्षी दलों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया।
देशभर से ग्राउंड रिपोर्ट्स: कहां-कहां क्या असर पड़ा
1. पश्चिम बंगाल – कोलकाता सड़कों पर सन्नाटा
कोलकाता के जादवपुर में वामपंथी संगठनों के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। सिलीगुड़ी में ड्राइवरों ने हेलमेट पहनकर बसें चलाईं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। देश बंद 2025:
2. केरल – व्यापारिक संस्थान बंद
केरल के चोट्टायम में लगभग सभी दुकानों और मॉल ने ‘भारत बंद’ का समर्थन करते हुए शटर गिरा दिए। बाजारों में सन्नाटा और लोकल कारोबारियों का विरोध स्पष्ट रूप से दिखा। देश बंद 2025:
3. झारखंड – रांची रेलवे स्टेशन वीरान
रांची रेलवे स्टेशन के पास पब्लिक ट्रांसपोर्ट लगभग गायब रहा। यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि ऑटो स्टैंड पूरी तरह खाली रहा।
4. उड़ीसा – खनन क्षेत्र प्रभावित
ओडिशा के कई खनन क्षेत्रों में मजदूरों ने काम बंद रखा, जिससे कोयला खनन रुक गया। यह बिजली उत्पादन और स्टील इंडस्ट्री पर असर डाल सकता है। देश बंद 2025:
5. तमिलनाडु – सफाई कर्मचारी नाराज
तमिलनाडु में सफाई कर्मचारियों ने नगर निगम कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया और काम बंद रखा, जिससे शहरों में साफ-सफाई प्रभावित हुई।
प्रभावित सेवाएं: ठप हुआ रोजमर्रा का जीवन
1. बैंकिंग सेवाएं
सरकारी और सहकारी बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। जहां खुले भी, वहां स्टाफ की भारी कमी देखी गई। ATM में कैश की समस्या बनी रही।
2. डाक और बीमादेश बंद 2025:
डाक सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं। पोस्ट ऑफिस बंद रहे और बीमा कंपनियों में भी हाजिरी कम दिखी। LIC और GIC के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहे।
3. सार्वजनिक परिवहन
कोलकाता, पटना, भुवनेश्वर और रांची जैसे शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट लगभग ठप रहा। बसें नहीं चलीं और सड़कों पर कम ही गाड़ियां दिखीं।
4. खनन व निर्माण
खनन क्षेत्रों में मजदूरों की अनुपस्थिति के कारण उत्पादन बंद रहा। वहीं, कई निर्माण स्थलों पर भी काम रुका हुआ देखा गया।
सरकारी प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल
अब तक सरकार की ओर से कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन कुछ मंत्रालयों ने पहले ही आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के निर्देश जारी किए थे। सरकार इसे सीमित असर वाली हड़ताल बताने की कोशिश कर रही है, लेकिन ट्रेड यूनियनों का दावा है कि यह अब तक की सबसे सफल राष्ट्रव्यापी हड़तालों में से एक है। देश बंद 2025:
हड़ताल को लेकर 8 बड़े सवाल-जवाब
- प्रश्न: इस हड़ताल में कौन-कौन शामिल है?
उत्तर: 10 केंद्रीय यूनियनों के अलावा किसान संगठन, ग्रामीण मजदूर, और विपक्षी दल भी शामिल हैं। - प्रश्न: उद्देश्य क्या है?
उत्तर: श्रमिक अधिकारों की रक्षा और निजीकरण का विरोध। - प्रश्न: क्या हड़ताल शांतिपूर्ण रही?
उत्तर: अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण, कुछ जगहों पर हल्की झड़प। - प्रश्न: क्या स्कूल-कॉलेज बंद रहे?
उत्तर: आधिकारिक तौर पर नहीं, लेकिन परिवहन ठप होने से उपस्थिति कम रही। - प्रश्न: क्या यह कानूनी हड़ताल है?
उत्तर: हां, जब तक यह शांतिपूर्ण और संगठित है। - प्रश्न: क्या किसान संगठन भी समर्थन कर रहे हैं?
उत्तर: जी हां, संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई संगठनों का समर्थन। - प्रश्न: क्या भविष्य में ऐसे और आंदोलन होंगे?
उत्तर: अगर सरकार ने मांगें नहीं मानी तो यूनियनें और आंदोलन करेंगी। - प्रश्न: क्या यह पहली बार है?
उत्तर: नहीं, नवंबर 2020, मार्च 2022 और फरवरी 2024 में भी ऐसी हड़तालें हो चुकी हैं।
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