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अयोध्या दीपोत्सव 2025

लेखक: Nitesh Panwar | Copyright © terdingnews.in

प्रकाशित: 19 अक्टूबर 2025 • रिपोर्ट: विशेष कवरेज — राम की नगरी से

अयोध्या की सड़कों, घाटों और राम की पैड़ी पर 19 अक्टूबर 2025 की शाम कुछ ऐसा हुआ जो माहौल, इतिहास और भावनाओं के बीच कहीं स्थायी दस्तक लेकर गया — 26,17,215 से अधिक earthen diyas (दीये) एक साथ जले और शहर को ऐसे रोशन कर दिया मानो आत्मा ने दीया जला लिया हो। अयोध्या दीपोत्सव 2025

सरकारी और आयोजक सूत्रों के अनुसार इस वर्ष के डीपोत्सव में कुल 26,17,215+ दीयों को एक साथ रोशन करने का आयोजन किया गया, जिसे Guinness World Records टीम द्वारा गिना और रिकॉर्ड दर्ज किया गया। अयोध्या दीपोत्सव 2025

नज़र आया वो लम्हा — जब पूरा शहर ‘दीपों का महासागर’ बना

शाम छह बजे के आसपास जैसे ही शहर से आती-आती सभी रोशनी धुंधली पड़ने लगी, अयोध्या के सरीयू घाटों और राम की पैड़ी पर एक अलौकिक तैयारी की चहल-पहल शुरू हो गई। स्थानीय विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और हजारों स्वयंसेवकों ने मुस्कान के साथ गंगा-नुमा सरीयू के किनारे दीपों की पंक्तियाँ सजा दीं। अयोध्या दीपोत्सव 2025

आख़िरकार, आयोजक के संकेत के साथ—एक ही पल में—लाखों दीयों में लौ जली और पूरा घाट, मंच और आसमान तक की रोशनी में समा गया। मोमबत्ती नहीं, मिट्टी के दीयों की वह लाल-पीली चमक थी जो सूने मन को भी गर्माहट दे देती थी।

तैयारी — महीनों की मेहनत, हज़ारों हाथ और सटीक समन्वय

यह आयोजन हवा में नहीं बनता — इसके पीछे महीनों की योजना, मिट्टी और तेल का बेहतरीन समन्वय, सुरक्षा का जाल और सैकड़ों प्रशासनिक बैठकें शामिल थीं। पर्यटन व संस्कृति विभाग, स्थानीय नगर निगम और स्वयंसेवी संस्थाएँ एक दूसरे के साथ समन्वय में रहीं। अयोध्या दीपोत्सव 2025

56 घाटों पर एक साथ दीप जलाई गईं — Ram Ki Paidi सहित सरीयू के दोनों किनारों पर विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजकों ने बताया कि ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों से दीयों की गिनती और रिकॉर्डिंग करवाई गई ताकि Guinness के मानकों के अनुरूप प्रमाण मिल सके। अयोध्या दीपोत्सव 2025

सामान और logistics

हर घाट पर लाखों की गिनती के साथ मिट्टी के दीये, तेल और काम करने वाले टीमों की ज़िम्मेदारी बांटी गई। सरल दिखने वाले इस काम में सैकड़ों ट्रकों पर दीयों का परिवहन, लाखों लीटर तेल, और स्थान-स्थान पर अग्नि सुरक्षा के इंतज़ाम शामिल थे। स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों को भी इस तैयारियों में अहम रोल मिला। अयोध्या दीपोत्सव 2025

राजनीतिक और आध्यात्मिक पटल

मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी ने इस आयोजन को राजनैतिक और राष्ट्रीय दृश्यता भी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपोत्सव केवल उत्सव नहीं बल्कि संस्कृति और पहचान का जश्न है। आयोजन के बहाने सुरक्षा पर भी कड़ी निगरानी रखी गई ताकि हजारों लोगों की भीड़ में कोई बदसोच या असुविधा न हो। अयोध्या दीपोत्सव 2025

धार्मिक महत्ता

अयोध्या का दीपोत्सव उस पौराणिक कथा का प्रतीक है जिसमें रामचंद्रजी के अयोध्या वापसी पर दीये जलाए गए थे — यही बात हर भक्त के दिल में गूंजती नजर आई। लोगों ने बताया कि यह दीपोत्सव आधुनिक आकर्षण और धार्मिक परंपरा का एक सुंदर संगम बन गया है। अयोध्या दीपोत्सव 2025

विश्व रिकॉर्ड — पूरे विश्व ने आँखें अयोध्या की ओर घुमा दी

न केवल दर्शनीय, बल्कि यह आयोजन रिकॉर्ड-निर्धारण के लिहाज़ से भी ऐतिहासिक रहा। Guinness World Records के मुताबिक और आयोजकों की गिनती के अनुसार इस बार अयोध्या ने 26,17,215+ दीयों को जला कर नया रिकॉर्ड दर्ज कराया। इस तथ्य की पुष्टि न्यूज़ एजेंसियों और सरकारी बयानों में भी हुई। अयोध्या दीपोत्सव 2025

“जब आख़िरी दीया भी जल गया, तो ऐसा लगा जैसे जमीन से आकाश तक रोशनी फैल गई हो — जो खूबसूरती हमने देखी, शब्दों में पिरोना मुश्किल है।”
— मोहन लाल, स्वयंसेवक, राम की पैड़ी

ड्रोन शो, रोशनी इफ़ेक्ट और सोशल मीडिया की टक्कर

इस वर्ष आयोजन में ड्रोन और लाइटिंग इफ़ेक्ट्स का उपयोग भी किया गया। ड्रोन के कैमरों से ली गई एयर फुटेज ने यह दिखाया कि किस तरह घाटों पर पैटर्न में दीयों को सजाया गया था — और यही फुटेज रिकॉर्ड खिलाड़ियों ने प्रमाण के रूप में पेश किया।

सोशल मीडिया पर #AyodhyaDeepotsav और #Deepotsav2025 जैसे हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे। विदेशी पर्यटकों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टर्स ने भी इस नज़ारे की तस्वीरें साझा कीं — जिससे अयोध्या की वैश्विक विज़िबिलिटी और बढ़ी। अयोध्या दीपोत्सव 2025

ऑनलाइन रिएक्शन

ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोगों ने भावनात्मक और वाइरल प्रतिक्रियाएँ दीं — कुछ ने कहा ‘ऐसा नज़ारा नहीं देखा’, तो कुछ ने आयोजकों की तारीफ में पोस्ट की। वहीं आलोचक वर्ग ने भी सवाल उठाए — बड़े आयोजन के पीछे खर्च, पर्यावरणीय असर और राजनीतिक संदेश पर — ये बहसें भी सोशल मीडिया पर समाई रहीं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर असर

होटल बुकिंग, खाने-पीने की दुकानों की बिक्री और स्थानीय क्राफ्ट्स की मांग में ज़बरदस्त उछाल देखा गया। आयोजक और पर्यटन विभाग का कहना है कि दीपोत्सव से न केवल श्रद्धालु आए, बल्कि व्यापारी, फ़ोटोग्राफ़र और छोटे व्यापारियों को भी लाभ हुआ। कई छोटे कुम्हारों और हस्तशिल्प कारोबारों ने महीनों पहले से तैयारियाँ ज़ोर शोर से कर ली थीं। अयोध्या दीपोत्सव 2025

होटल और ट्रांसपोर्ट

18-20 अक्टूबर के बीच शहर में पर्याप्त भीड़ के मद्देनज़र रेलवे और सड़क परिवहन में विशेष ट्रेनें और बसें चलाई गईं। कुछ ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े गए और टिकटों की माँग पर जिलाधिकारी ने स्थिति नियंत्रण में रखी।

आस्था, भावनाएँ और व्यक्तिगत किस्से — पढ़िए मैदान से कुछ दिल के टुकड़े

“हम दिल्ली से आए हैं — माँ ने कहा कि इस बार राम मंदिर के बाद दीपोत्सव ज़रूरी है। जैसे ही हमने घाट पर दीया जला, माँ की आँखों में आंसू आ गए। ये खुशी के आंसू थे।”
— सीमा वर्मा, श्रद्धालु अयोध्या दीपोत्सव 2025

एक पुजारी ने बताया कि दीपोत्सव में शामिल हर व्यक्ति ने इसे अपने जीवन का अद्भुत अनुभव बताया। किसी ने कहा — “यह सिर्फ रोशनी नहीं, हमारी पीढ़ियों की उम्मीदें हैं” — वहीं कुछ युवा फोटोग्राफ़रों ने नज़ारे को सोशल प्लेटफ़ॉर्म्स पर शेयर कर उसे अंतरराष्ट्रीय दर्शक तक पहुँचाया।

पर्यावरण और सुरक्षा के सवाल

जहाँ उत्सव ने लोगों के दिलों को छूआ, वहीं पर्यावरण-प्रेमियों ने मिट्टी के दीयों और तेल के उपयोग से उत्पन्न हुए कचरे और धुएँ के मुद्दे उठाए। आयोजकों ने कहा कि जल निकासी व्यवस्था, सफाई दल और कचरा प्रबंधन तैनात किए गए थे। साथ ही, अग्नि सुरक्षा के लिए फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी मेडिकल टीम भी मौजूद रही। अयोध्या दीपोत्सव 2025

कुछ स्थानीय एनजीओ ने आयोजन के बाद कचरा प्रबंधन की तस्वीरें साझा कर सुधार की गुंजाइश बताई — आयोजन के बाद तालमेल और सतर्कता की ज़रूरत पर जोर दिया गया।

कौन-सा रिकॉर्ड टूटा और क्या मायने रखता है?

आयोजकों का कहना है कि पिछले सालों में अयोध्या ने लगातार बड़ी संख्या में दीये जलाकर रिकॉर्ड बनाया — 2024 में भी 25 लाख से ज़्यादा दीयों का कीर्तिमान दर्ज किया गया था — और 2025 में इसे और बढ़ाकर 26 लाख के पार ले जाया गया। यह सिर्फ संख्या नहीं — यह सांस्कृतिक और व्यवस्थागत कौशल का प्रमाण भी है। अयोध्या दीपोत्सव 2025

अयोध्या का बदला हुआ चेहरा — धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय

राम मंदिर के पुनर्निर्माण और बड़े आयोजन जैसे डीपोत्सव ने अयोध्या को देश के धार्मिक-पर्यटन नक्शे पर और ऊँचा उठाया है। राज्य सरकार और पर्यटन विभाग की रणनीति में इस तरह के आयोजनों को ग्लोबल दर्शक तक पहुँचाना शामिल है।

लंबी चलने वाली चुनौतियाँ

यात्रा की बढ़ी हुई माँग, अवसंरचना का दबाव और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने की ज़रूरत — इन सब पर ध्यान देने की सलाह विशेषज्ञ दे रहे हैं। आयोजक कहते हैं कि भविष्य में और भी स्थायी और स्वच्छ तरीकों को अपनाने का प्लान बना रहे हैं— जैविक तेल, रिसाइकलिंग-प्रोग्राम और कम-धुएँ वाले विकल्प जैसी पहलें योजना में हैं। अयोध्या दीपोत्सव 2025

जो लोग बोले — प्रशंसा से आलोचना तक

इस आयोजन की चर्चा में दो धड़ों की आवाज़ें थीं — एक तरफ़ श्रद्धालु और पर्यटक जो यह नज़ारा देखकर भावुक हुए, दूसरी तरफ़ आलोचक जो आयोजन के लागत, राजनीतिक संदर्भ और पर्यावरणीय प्रभाव पर सवाल उठा रहे थे। दोनों ही आवाज़ें सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन गईं।

अंतरराष्ट्रीय कवरेज और मीडिया का रोल

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इस आयोजन की जगह-जगह कवरेज की। एयर फुटेज और इंटरनेशनल एजेंसियों ने यह कहानी ब्रॉडकास्ट की जिससे अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूती मिली।

निचोड़ — क्यों यह दीपोत्सव सिर्फ रोशनी का खेल नहीं था

19 अक्टूबर 2025 की रात ने दिखाया कि एक नगर कैसे अपनी आस्था, पहचान और सामूहिक इच्छाशक्ति के बल पर कुछ ऐसा कर सकता है जो इतिहास में दर्ज हो जाए। यह आयोजन धार्मिक भावना और आधुनिक संगठन का मेल बनकर उभरा — जहाँ मिट्टी के छोटे-छोटे दीयों ने बड़ी कहानी सुनाई।

यह कहना गलत नहीं होगा कि दीपोत्सव ने अयोध्या को सिर्फ रोशनी नहीं दी — उसने शहर को एक नई पहचान, पर्यटक आकर्षण और विश्वस्तर की दृश्यता दी। पर साथ ही यह हमने सीखा कि बड़े आयोजनों के साथ ज़िम्मेदारी भी आती है — पर्यावरण, सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं के प्रति सतर्कता अनिवार्य है।अयोध्या दीपोत्सव 2025

आगे का रास्ता — भविष्य के दीपोत्सव कैसे और बेहतर होंगे

  • सस्टेनेबिलिटी: कम धुएँ वाले विकल्प और रिसाइकलिंग प्रोग्राम लागू करने होंगे।
  • कम्युनिटी-केंद्रड अप्रोच: स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों को आर्थिक लाभ पहुंचाना।
  • डिजिटल वेरिफिकेशन: ड्रोन और हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरा निगरानी से रिकॉर्डिंग को और पारदर्शी बनाना।
  • ट्रैफिक और लॉजिस्टिक्स: आगंतुकों के लिए बेहतर आवागमन और होटल इंफ्रास्ट्रक्चर।

फ़ोटोग्राफ़ और वीडियोग्राफी— उस रात की कुछ इमेज-स्टोरीज़

ड्रोन से ली गई कुछ इमेजेस ने रात को ‘मॉरल-सीन’ की तरह कैप्चर किया — सरीयू तट पर फैलती रोशनी और किनारों पर खड़ी मूरतें। ये तस्वीरें न केवल यादगार रहीं, बल्कि रिकॉर्ड प्रमाण के रूप में भी काम आईं।

समाप्ति — आख़िरी अलविदा लेकिन यादें सदा के लिए

अयोध्या दीपोत्सव 2025 ने दिखाया कि आस्था, आयोजन-कुशलता और सामूहिक योगदान मिलकर इतिहास रच सकते हैं। जब लाखों दीपों की लौ शांत हुई, तो लोग दिल से जान गए कि उन्होंने कुछ खास का हिस्सा बने का श्रेय पाकर लौटना है — एक रात जब अयोध्या ने पूरी दुनिया को रोशनी दी। https://terdingnews.in/diwali-2025-dhanteras-to-bhai-dooj-market-trends/ https://www.aajtak.in/

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