Cheteshwar Pujara संन्यास:

Cheteshwar Pujara संन्यास:

भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक, चेतेश्वर पुजारा ने रविवार को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेकर अपने सुनहरे करियर पर विराम लगा दिया। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने भारतीय टीम के लिए हमेशा दीवार बनकर संघर्ष किया और कठिन परिस्थितियों में भी डटकर खड़ा रहा। उनका यह फैसला भारतीय क्रिकेट के लिए भावुक पल लेकर आया है। जहां करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों ने उन्हें मैदान पर धैर्य, संयम और दृढ़ संकल्प के साथ खेलते देखा, वहीं अब वे मैदान से दूर होकर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगे।

संन्यास की घोषणा और इसके पीछे की सोच

चेतेश्वर पुजारा ने रविवार, 24 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया के जरिए अपने संन्यास की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया बल्कि पिछले एक सप्ताह से वे इस पर गहराई से विचार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने देखा कि युवा खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और भारतीय टीम में अपनी जगह बना रहे हैं, तब उन्हें लगा कि यह सही समय है मैदान को अलविदा कहने का। Cheteshwar Pujara संन्यास:

पुजारा ने यह भी कहा कि उनका यह फैसला न सिर्फ व्यक्तिगत है बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है। उनके मुताबिक, “जब नई पीढ़ी मजबूती से आगे आ रही हो तो वरिष्ठ खिलाड़ियों को गरिमा के साथ रास्ता छोड़ देना चाहिए।”

शानदार टेस्ट करियर का सफर

पुजारा ने अपने करियर में 103 टेस्ट मैच खेले और 43.60 की औसत से 7,195 रन बनाए। यह आंकड़ा उन्हें भारत के सर्वकालिक महान बल्लेबाजों की सूची में आठवें स्थान पर ले जाता है। उन्होंने अपने करियर में 18 शतक और 34 अर्धशतक जमाए। पुजारा ने विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ विदेशी धरती पर बेहतरीन पारियां खेलीं, जिनमें उनकी बल्लेबाजी ने भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम योगदान दिया। Cheteshwar Pujara संन्यास:

उनका खेल हमेशा तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती के लिए जाना गया। उन्हें आधुनिक दौर का ‘दीवार’ कहा गया क्योंकि वे लंबी पारी खेलकर विपक्षी गेंदबाजों को थकाने में माहिर थे।

पहली पारी और शुरुआत का संघर्ष

चेतेश्वर पुजारा ने 2010 में बेंगलुरु टेस्ट के जरिए अपना अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू किया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए उस मैच में पहली पारी में वे मात्र 5 रन बना पाए, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने 72 रनों की शानदार पारी खेलकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यह उनकी बल्लेबाजी शैली का पहला संकेत था कि वे टीम इंडिया के लिए लंबी रेस के घोड़े साबित होंगे। Cheteshwar Pujara संन्यास:

घरेलू क्रिकेट और सौराष्ट्र से नाता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने से पहले पुजारा ने घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कुल 21,301 रन बनाए, जिसमें अनगिनत शतक शामिल हैं। रणजी ट्रॉफी में उनका योगदान इतना बड़ा रहा कि वे सौराष्ट्र क्रिकेट का चेहरा बन गए। यहां तक कि अपने करियर के अंतिम दिनों में भी उन्होंने सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी में रन बनाए और टीम को मजबूत किया। Cheteshwar Pujara संन्यास:

महान पारियां और यादगार लम्हे

पुजारा का करियर कई यादगार पारियों से भरा है। चाहे 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत में उनकी लंबी पारियां हों या इंग्लैंड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेली गई बेहतरीन पारियां—हर बार उन्होंने साबित किया कि वे कठिन हालात में टीम के लिए दीवार बन सकते हैं। उन्होंने कई बार घंटों तक क्रीज पर टिककर विपक्षी गेंदबाजों की रणनीतियों को नाकाम किया। यही गुण उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग बनाता था। Cheteshwar Pujara संन्यास:

दिग्गजों की प्रतिक्रियाएं और विदाई संदेश

पुजारा के संन्यास के बाद भारतीय क्रिकेट के कई दिग्गजों ने उन्हें भावुक विदाई दी। पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़, विराट कोहली, अनिल कुंबले और कई अन्य खिलाड़ियों ने उनके योगदान की सराहना की। फैंस ने सोशल मीडिया पर पुजारा को ‘मिस्टर डिपेंडेबल’, ‘द वॉल 2.0’ और ‘साइलेंट वॉरियर’ जैसे नामों से याद किया।

करियर के आँकड़े एक नज़र में

  • टेस्ट मैच: 103
  • कुल रन: 7,195
  • औसत: 43.60
  • शतक: 18
  • अर्धशतक: 34
  • प्रथम श्रेणी क्रिकेट रन: 21,301

संन्यास के बाद की योजनाएं

पुजारा ने संकेत दिए कि वह क्रिकेट से जुड़े रहेंगे और भविष्य में कोचिंग, कमेंट्री या युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और अब समय है कि वे इस खेल को कुछ लौटाएं। Cheteshwar Pujara संन्यास:

निष्कर्ष

चेतेश्वर पुजारा का करियर भारतीय क्रिकेट इतिहास का अमूल्य अध्याय है। उन्होंने दिखाया कि धैर्य, संयम और मेहनत से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। उनका संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक युग के अंत जैसा है, लेकिन उनकी यादगार पारियां, उनकी जुझारू भावना और खेल के प्रति उनका समर्पण हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। Cheteshwar Pujara संन्यास: https://www.jagran.com/cricket/headlines-cheteshwar-pujara-breaks-silence-after-retirement-24023941.html https://terdingnews.in/asia-cup-2025-india-vs-pakistan/

लेखक: Nitesh Panwar | स्रोत: खेल डेस्क | © 2025 terdingnews.in

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